चाइनीज मंझे ने ली सात साल की मासूम की जान

चीन से आने वाले मंझे में उलझकर अब तक कई जिंदगियां तबाह हो चुकी हैं

वाराणसी। हालांकि यह मौसम पतंगबाजी का नहीं है. मगर लॉकडाउन के चलते लोग पतंगबाजी से बाज नहीं आ रहे. शनिवार को चाइनीज मंझे की चपेट में आकर चौकाघाट निवासी संदीप गुप्ता की सात वर्षीय बेटी कृतिका काल के गाल में असमय समा गई.

संदीप पांडेयपुर से बेटी को दवा दिलाकर शनिवार की शाम घर लौट रहे थे. पांडेयपुर फ्लाईओवर पर कृतिका की गर्दन पर चाइनीज मंझा आ गया. गर्दन कटने के बाद कृतिका छटपटाने लगी. संदीप आनन-फानन कृतिका को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. कृतिका परिवार में दो बहनों में बड़ी थी. छोटा भाई एक साल का है. पिता की घौसाबाद में ऑटो पार्ट्र्स की दुकान है.

मंझा कारोबार से जुड़े एक सज्जन ने बताया कि कि माझा बनाने में चावल, सरेस, रंग और सूती धागे का इस्तेमाल होता है. इसे धारदार बनाने के लिए काच का बुरादा लगाया जाता है. वहीं चाइनीज माझा प्लास्टिक के धागे से तैयार होता है. इस पर लगे केमिकल व लोहे के बुरादा से करेंट प्रवाहित होने का खतरा रहता है. यह गलता भी नहीं है. गर्दन में फंसकर यह टूटता नहीं और लोग जान तक गवा बैठते हैं. बाजार में मिलने वाले सभी मंझे घातक होते हैं, लेकिन इनमें चायनीज ज्यादा खतरनाक है.

चीन से आने वाले मंझे में उलझकर अब तक कई जिंदगियां तबाह हो चुकी हैं. पिछले हाल के वर्षों में ऐसे दर्जनभर से अधिक मामले में सामने आ चुके हैं. पक्षी भी इसके शिकार हो रहे हैं. बावजूद अफसरों की नींद नहीं टूट रही है. यह हाल तब है जबकि चाइनीज मंझे पर अदालती रोक है.

चौक थाना क्षेत्र में मांझा व पतंग की दुकानें सजती हैं. यह पतंग बाजार खिचड़ी पर खरीदारों से गुलजार रहता है. इस बाजार में हर तरह के मंझे व पतंग हैं. यहां प्रतिबंधित चाइनीज मंझा भी मिल जाएगा. अन्य पतंग बाजारों में भी मांग पर चाइनीज मंझा मिल जाता है. हालांकि प्रशासन ने पिछले साल इस खतरनाक और जानलेवा माझे पर प्रतिबंध लगाने के लिए छापेमारी की थी. इसके बाद सक्रियता नहीं रही. मोटे तौर पर एक अनुमान है कि सिर्फ बनारस में सालाना आठ करोड़ का चाइनीज मंझे का कारोबार है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: